इसे भारत की राजनीतिक या आर्थिक गिरावट ही कहीं जा सकती है क्योंकि इतने सस्ते क्रूड ऑयल के बावजूद अपने सीमित रिज़र्व के कारण,हम फायदा नहीं ले पा रहे है। चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो किसी ने भी अपने यहां SPR (Strategic petroleum reserve) बढ़ाने की कोशिश नही की, इसका परिणाम यह हुआ की हमारे पास दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा काफी कम रिज़र्व है। आप इसे ऐसे समझे अमेरिका के पास 730 मिलियन बैरल, चीन के पास 550 मिलियन बैरल, जापान के पास 528 मिलियन बैरल और दक्षिण कोरिया के पास 214 मिलियन बैरल का पेट्रोलियम रिज़र्व कैपेसिटी है, परन्तु हमारे भारत के पास केवल 39 मिलियन बैरल का ही कैपेसिटी है। यही कारण है कि भारत क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों का फायदा उठाने में असमर्थ है, और इससे हमें समझना होगा कि युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय हमारी स्थिति दूसरे देशों से कितनी बद्तर हो सकती है।
बिहार आज एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ चल रही हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहाँ एक तरफ राज्य गरीबी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की रफ्तार में यह देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ रहा है। आय का वर्तमान स्तर: एक बड़ी चुनौती रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत आय के मामले में बिहार अभी भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है: सबसे कम प्रति व्यक्ति आय: बिहार के लोगों की औसत सालाना कमाई ₹69,321 (2024-25) दर्ज की गई है, जो देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे कम है। अर्थव्यवस्था का आकार: वर्तमान मूल्यों पर बिहार का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 8 लाख 99 हजार 20 करोड़ रुपये आंका गया है। यह आकार देश के 12 राज्यों से कम है। विकास की तेज रफ्तार: एक नई उम्मीद भले ही वर्तमान आय कम हो, लेकिन बिहार के विकास की गति बेहद प्रभावशाली है: 22 राज्यों से आगे: बिहार की विकास दर देश के 22 राज्यों से अधिक है। इसका मतलब है कि बिहार अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बहुत तेजी से दौड़ रहा...