इसे भारत की राजनीतिक या आर्थिक गिरावट ही कहीं जा सकती है क्योंकि इतने सस्ते क्रूड ऑयल के बावजूद अपने सीमित रिज़र्व के कारण,हम फायदा नहीं ले पा रहे है। चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो किसी ने भी अपने यहां SPR (Strategic petroleum reserve) बढ़ाने की कोशिश नही की, इसका परिणाम यह हुआ की हमारे पास दुनिया के अन्य देशों की अपेक्षा काफी कम रिज़र्व है। आप इसे ऐसे समझे अमेरिका के पास 730 मिलियन बैरल, चीन के पास 550 मिलियन बैरल, जापान के पास 528 मिलियन बैरल और दक्षिण कोरिया के पास 214 मिलियन बैरल का पेट्रोलियम रिज़र्व कैपेसिटी है, परन्तु हमारे भारत के पास केवल 39 मिलियन बैरल का ही कैपेसिटी है। यही कारण है कि भारत क्रूड ऑयल की गिरती कीमतों का फायदा उठाने में असमर्थ है, और इससे हमें समझना होगा कि युद्ध या प्राकृतिक आपदा के समय हमारी स्थिति दूसरे देशों से कितनी बद्तर हो सकती है।
चिकित्सा पर्यटन का अर्थ है जब कोई व्यक्ति अपने देश की तुलना में बेहतर या सस्ते इलाज के लिए दूसरे देश की यात्रा करता है। भारत वैश्विक चिकित्सा पर्यटन सूचकांक में 46 देशों में से 10वें स्थान पर है। बाजार और विकास के आंकड़े भारत में इलाज की लागत अमेरिका जैसे विकसित देशों की तुलना में औसतन 42 गुना कम है। वर्ष 2022 में भारत का चिकित्सा पर्यटन बाजार 6 बिलियन डॉलर था, जिसके 2026 तक बढ़कर 13.42 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है। 2024 में लगभग 6.44 लाख विदेशी नागरिक इलाज के लिए भारत आए। इस क्षेत्र में 2030 तक 18 लाख नए रोजगार सृजित होने की संभावना है। भारत के चिकित्सा केंद्र बनने के मुख्य कारण किफायती उपचार: भारत में जटिल ऑपरेशन जैसे हार्ट बाईपास की लागत लगभग 5.8 लाख रुपये है, जबकि अमेरिका में यही खर्च 1.08 करोड़ रुपये तक आता है। प्रतीक्षा समय की कमी: ब्रिटेन या कनाडा जैसे देशों में सर्जरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, जबकि भारत में तत्काल अपॉइंटमेंट मिल जाता है। विश्व स्तरीय गुणवत्ता: भारत में कुशल डॉक्टरों की बड़ी संख्या है और कई अस्पताल अंतरराष्ट्रीय मानकों (JCI और NABH) द...