TisriDiary : A Cyclopaedia Skip to main content

Posts

Showing posts from January, 2026

​दोगुनी रफ्तार, नई उम्मीद: क्या बिहार की ये छलांग गरीबी का अंत करेगी?

बिहार आज एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ चल रही हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहाँ एक तरफ राज्य गरीबी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की रफ्तार में यह देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ रहा है। ​ आय का वर्तमान स्तर: एक बड़ी चुनौती ​रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत आय के मामले में बिहार अभी भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है: ​ सबसे कम प्रति व्यक्ति आय: बिहार के लोगों की औसत सालाना कमाई ₹69,321 (2024-25) दर्ज की गई है, जो देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे कम है। ​ अर्थव्यवस्था का आकार: वर्तमान मूल्यों पर बिहार का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 8 लाख 99 हजार 20 करोड़ रुपये आंका गया है। यह आकार देश के 12 राज्यों से कम है। ​ विकास की तेज रफ्तार: एक नई उम्मीद ​भले ही वर्तमान आय कम हो, लेकिन बिहार के विकास की गति बेहद प्रभावशाली है: ​ 22 राज्यों से आगे: बिहार की विकास दर देश के 22 राज्यों से अधिक है। इसका मतलब है कि बिहार अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बहुत तेजी से दौड़ रहा...

परियोजना कार्य (अर्थशास्त्र) , वर्ग — X

परियोजना कार्य-  ब्रांडेड उत्पादों के नाम ब्रांड (Brand) क्या है ? एक ब्रांड एक ऐसा नाम , प्रतीक (Logo), या डिजाइन होता है जो एक कंपनी के उत्पादों को दूसरी कंपनी के उत्पादों से अलग बनाता है । जब किसी उत्पाद की पहचान उसके नाम से होने लगती है और लोग उस पर भरोसा करने लगते हैं , तो वह ' ब्रांड ' बन जाता है । प्रमुख ब्रांडेड उत्पादों के उदाहरण अध्ययन की सुविधा के लिए हम ब्रांड्स को अलग-अलग श्रेणियों में बाँट सकते हैं : खाद्य एवं पेय पदार्थ (Food & Beverages):  अमूल (Amul), ब्रिटानिया (Britannia), नेस्ले (Nestle), कोका-कोला । इलेक्ट्रॉनिक्स (Electronics):  सैमसंग (Samsung), एप्पल (Apple), एलजी (LG), सोनी (Sony) पहनावा और जूते (Apparel & Footwear):  एडिडास (Adidas), नाइकी (Nike), बाटा (Bata), रेमंड (Raymond) प्रसाधन सामग्री (Toiletries):  लक्स (Lux), कोलगेट (Colgate), डव (Dove), सनसिल्क ब्रांडेड उत्पादों की विशेषताएँ गुणवत्ता का आश्वासन :  ब्रांडेड उत्पाद आ...

Most viewed

​दोगुनी रफ्तार, नई उम्मीद: क्या बिहार की ये छलांग गरीबी का अंत करेगी?

बिहार आज एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ चल रही हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहाँ एक तरफ राज्य गरीबी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की रफ्तार में यह देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ रहा है। ​ आय का वर्तमान स्तर: एक बड़ी चुनौती ​रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत आय के मामले में बिहार अभी भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है: ​ सबसे कम प्रति व्यक्ति आय: बिहार के लोगों की औसत सालाना कमाई ₹69,321 (2024-25) दर्ज की गई है, जो देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे कम है। ​ अर्थव्यवस्था का आकार: वर्तमान मूल्यों पर बिहार का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 8 लाख 99 हजार 20 करोड़ रुपये आंका गया है। यह आकार देश के 12 राज्यों से कम है। ​ विकास की तेज रफ्तार: एक नई उम्मीद ​भले ही वर्तमान आय कम हो, लेकिन बिहार के विकास की गति बेहद प्रभावशाली है: ​ 22 राज्यों से आगे: बिहार की विकास दर देश के 22 राज्यों से अधिक है। इसका मतलब है कि बिहार अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बहुत तेजी से दौड़ रहा...