क्या भारत में 'जनसंख्या विस्फोट' का डर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है? Skip to main content

क्या भारत में 'जनसंख्या विस्फोट' का डर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका है?

​हम बचपन से स्कूल की किताबों में पढ़ते आ रहे हैं कि भारत की सबसे बड़ी समस्या "जनसंख्या विस्फोट" है। लेकिन हाल ही में आए जनसांख्यिकीय आँकड़े (Demographic Data) कुछ बिल्कुल ही अलग और चौंकाने वाली कहानी बयां कर रहे हैं!

​आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि भारत की आबादी में कितना बड़ा बदलाव आ रहा है और यह हमारे भविष्य को कैसे प्रभावित करेगा। 

तेज़ी से घट रही है 'प्रजनन दर' (TFR)

​कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate - TFR) का मतलब होता है कि औसतन एक महिला अपने जीवनकाल में कितने बच्चों को जन्म देती है।

​2023 में: यह दर 1.92 थी।

​2024 में: यह और घटकर 1.88 (लगभग 1.9) पर आ गई है।

​यह गिरावट कोई अचानक नहीं हुई है। 1985 में भारत की TFR 4.3 थी, और तब से हर साल इसमें औसतन 0.06 की कमी आ रही है।

स्मार्टफोन का मिथक: बहुत से लोग मानते हैं कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के आने से लोग बच्चे कम पैदा कर रहे हैं। लेकिन आँकड़े कहते हैं कि स्मार्टफोन आने से पहले भी भारत में TFR इसी रफ्तार से गिर रहा था! यानी लाइफस्टाइल में बदलाव सालों से जारी है।

​'रिप्लेसमेंट रेट' से भी नीचे आ चुका है भारत 

​जनसंख्या को स्थिर रखने के लिए (यानी जितनी आबादी आज है, उतनी ही आगे रहे) विकसित देशों में TFR 2.1 होना जरूरी माना जाता है। इसे Replacement Rate कहते हैं।

​लेकिन भारत में जन्म के समय लड़कों और लड़कियों के अनुपात में थोड़ा असंतुलन होने के कारण हमारे लिए यह टारगेट 2.15 है।

​राहत की बात यह है कि जन्म के समय लिंगानुपात सुधर रहा है, 2018-20 में 1000 लड़कों पर 907 लड़कियाँ थीं, जो अब 2022-24 में 918 हो गई हैं।

​इसके बावजूद, भारत अपने रिप्लेसमेंट टारगेट (2.15) से 0.27 बच्चे नीचे आ चुका है! इसका सीधा मतलब है कि भविष्य में हमारी आबादी का बढ़ना धीमा और फिर स्थिर हो जाएगा।

एक देश, दो अलग भारत!

​राष्ट्रीय औसत (1.88) तो सिर्फ एक नंबर है, लेकिन भारत के राज्यों और शहरों में बहुत बड़ी असमानता है:

  • ​बिहार का हाल: बिहार में TFR अभी भी 2.9 है, जो दिखाता है कि वहाँ आबादी अभी भी बढ़ रही है।

  • केरल और दिल्ली का हाल: केरल की TFR घटकर 1.3 और दिल्ली की तो सिर्फ 1.2 रह गई है! यह दर अमेरिका से भी कम है और यूरोप के इटली या स्पेन जैसे देशों के बराबर है जहाँ आबादी बूढ़ी हो रही है।

शहरी बनाम ग्रामीण: भारत के गाँवों में TFR 2.1 (एकदम संतुलित) है, जबकि शहरों में यह गिरकर महज 1.5 रह गई है। शहरों की महँगाई और करियर की व्यस्तता इसका बड़ा कारण हो सकती है।

2031 का भारत कैसा होगा?

​अगर यही ट्रेंड जारी रहा, तो 2031 तक भारत की TFR 1.57 तक पहुँच जाएगी, जो कि आज के अमेरिका के बराबर है। यानी आने वाले समय में हमें "ज्यादा आबादी" की नहीं, बल्कि "बूढ़ी होती आबादी" और "काम करने वाले युवाओं की कमी" जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।


मुख्य शब्दावली :

Total Fertility Rate (TFR): एक महिला अपने संपूर्ण प्रजनन काल (आम तौर पर 15-49 वर्ष) में औसतन कितने बच्चों को जन्म देती है।

Replacement Rate: वह प्रजनन दर जिस पर जनसंख्या का आकार एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में स्थिर रहता है।

Sex Ratio at Birth: प्रति 1000 जीवित जन्मे लड़कों पर लड़कियों की संख्या।


आपकी क्या राय है? क्या शहरों में महँगाई, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और बदलती लाइफस्टाइल ही इस गिरावट की मुख्य वजह है? क्या छोटे परिवार का यह ट्रेंड भारत के आर्थिक भविष्य के लिए अच्छा है या बुरा?

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*Secondary Data

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