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​दोगुनी रफ्तार, नई उम्मीद: क्या बिहार की ये छलांग गरीबी का अंत करेगी?

बिहार आज एक ऐसे आर्थिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ चुनौतियाँ और संभावनाएँ साथ-साथ चल रही हैं। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि जहाँ एक तरफ राज्य गरीबी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विकास की रफ्तार में यह देश के कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ रहा है।

आय का वर्तमान स्तर: एक बड़ी चुनौती

​रिपोर्ट के अनुसार, व्यक्तिगत आय के मामले में बिहार अभी भी देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे है:

  • सबसे कम प्रति व्यक्ति आय: बिहार के लोगों की औसत सालाना कमाई ₹69,321 (2024-25) दर्ज की गई है, जो देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची में सबसे कम है।
  • अर्थव्यवस्था का आकार: वर्तमान मूल्यों पर बिहार का सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) 8 लाख 99 हजार 20 करोड़ रुपये आंका गया है। यह आकार देश के 12 राज्यों से कम है।

विकास की तेज रफ्तार: एक नई उम्मीद

​भले ही वर्तमान आय कम हो, लेकिन बिहार के विकास की गति बेहद प्रभावशाली है:

  • 22 राज्यों से आगे: बिहार की विकास दर देश के 22 राज्यों से अधिक है। इसका मतलब है कि बिहार अपनी अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए बहुत तेजी से दौड़ रहा है।
  • जीडीपी विकास दर: साल 2024-25 में बिहार की जीडीपी विकास दर 13.07 फीसदी रही।
  • लगातार सुधार: पिछले तीन वर्षों के आंकड़े (12.27%, 15.52%, और 13.85%) दर्शाते हैं कि राज्य अपनी विकास की निरंतरता को बनाए रखने में सफल रहा है।

​यह रिपोर्ट साफ करती है कि बिहार 'लो बेस इफेक्ट' के बावजूद अपनी आर्थिक स्थिति को बदलने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। कम आय एक बड़ी बाधा है, लेकिन दो अंकों वाली यह विकास दर भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत है।

Comments

  1. Sir अपना बिहार बढ़ता ओर बदलता बिहार है। सिंगल डिजिट में हो या डबल पर हमरा बिहार प्रगतिशील हैं.

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